मजबूत हूँ मैं


छूने दो आसमान मुझे,

आजादी दो जंजीरों से,
नही चाहिए कोई दोलत,
लड़ने दो तकदीरो से,
करना चाहूं वो कर सकती,
लड़ सकतीं तकलीफों से,
क्योकि खुद को  जानती हूँ,


मजबूर नहीं मजबूत हूँ मैं.....
आगे बढ़ना आसान नहीं है,
पर खुद पर विश्वास अटल है,
एक दिन पाऊं अपनी मंजिल को,
मन की चाह प्रबल है,
सिद्ध कर सकती हूं खुद को,
उसका एक सबूत हूँ मैं,
क्योकि खुद को जानती हूँ,
मजबूर नहीं मजबूत हूँ मैं.....


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