नारी है हम



ना है कि‍सी से पीछे
ना है किसी से कम
शान से हूँ कहती आज
हाँ नारी है हम....
आसमान को चीरकर
चाँद तक जा सकती हूँ
जो चाहूं मै आज वो
सबकुछ पा सकती हूँ.... 
अपनी करुणा और दया को
अपना शस्त्र बनाउगी 
मुझको जो कमतर समझेगा 
उससे मै लड़ जाऊँगी........ 
मै ही अटल हूँ मै ही प्रबल हूँ 
मुझसे सारा संसार हैं 
मुझ बिन ये दुनिया बस एक 
नाव बिन पतवार है........ 

मै ही माँ हूँ  मैं ही ममता 
मै ही हूँ करुणा और क्षमता
फिर भी नहीं मुझे कोई दंभ
शान से फिर कहती आज
हाँ नारी हैं हम......... 

         

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