बेटियां



घर के गुलशन में कलियां सी होती है बेटियां 
पूरे घर में चहकती परिया सी होती है बेटियां 
मां की पर‌छाई और बाप की लाडली होती है बेटियां
भाई की जान और बहन की सहेली सी होती है बेटियां
 जिस दिन यह कली फूल बन खिल जाती है 
 उस दिन अपनी क्यारी को छोड़ किसी और आंगन को मंहकाने चली जाती है
 कैसे अपने आप को किसी और रंगत में ढाल लेती हैं बेटियां
  कैसे एक बेपरवाह से अपने आप को जिम्मेदारी में ढाल लेती हैं बेटियां
  रोता है एक बाप इसी दिन के लिए बेटी पैदा होने पर आखिर क्यों अचानक से पराई हो जाती हैं बेटियां
  

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